Behad Souls Blog Posts

"Param Shanti. This space is dedicated to the Behad ki Atma—the infinite souls ready to transcend the boundaries of the limited world. Here, we share deep insights into our true origins, the process of self-transformation, and the path back to the Paramdham. It is time to awaken from the long sleep of the Kalpa and reclaim your divine heritage."

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स्वयं परिवर्तन से विश्व परिवर्तन: ज्ञान, योग, सेवा और धारणा की शक्ति
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स्वयं परिवर्तन से विश्व परिवर्तन: ज्ञान, योग, सेवा और धारणा की शक्ति

ब्रह्मज्ञान, योग, सेवा और धारणा — यही हैं स्वयं परिवर्तन के चार दिव्य स्तंभ, जिनके द्वारा आत्मा परमशान्ति को प्राप्त करती है और विश्व परिवर्तन की चाबी बनती है। ज्ञान आत्मा को जीवित करता है, योग पावर देता है, सेवा वायुमंडल बदलती है और धारणा आत्मा को दिव्य स्वरूप में स्थित करती है

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हम दुःखी क्यों हैं? आत्मा में पावर लाकर सुखी कैसे बनें – बेहद ज्ञान से समाधान
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हम दुःखी क्यों हैं? आत्मा में पावर लाकर सुखी कैसे बनें – बेहद ज्ञान से समाधान

हम दुःखी क्यों हैं? क्योंकि हम आत्मा की शक्ति खो चुके हैं और देह के मोह में फंसे हैं। बापूजी बताते हैं कि सच्चा सुख तभी मिलेगा जब हम आत्मा बनकर परम तत्वों से पावर भरें। आत्मा में पावर आते ही कर्म बदलते हैं, और कर्म बदलते ही जीवन सुखी हो जाता है।

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ब्रह्मचर्य का असली अर्थ: बेहद की आत्मा की पवित्रता
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ब्रह्मचर्य का असली अर्थ: बेहद की आत्मा की पवित्रता

ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल इन्द्रिय संयम नहीं, बल्कि आत्मा का ब्रह्मस्वरूप में स्थित होना है। जब आत्मा निराकार ब्रह्म को स्मरण करते हुए कर्मयोगी बनती है, तभी वह सच्ची पवित्रता को प्राप्त करती है। यही आत्मस्वरूप का साक्षात्कार है — तीसरे नेत्र का खुलना।

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स्थितप्रज्ञ: वह अवस्था जहाँ आत्मा परमशांति को छूती है
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स्थितप्रज्ञ: वह अवस्था जहाँ आत्मा परमशांति को छूती है

स्थितप्रज्ञ वह आत्मा है जो सुख-दुःख, हार-जीत, लाभ-हानि की लहरों में भी सागर जैसी शांत रहती है। जब आत्मा परमात्मा को जानकर अपने ब्रह्मस्वरूप में स्थित होती है, तभी वह स्थितप्रज्ञ बनती है — यही परमशांति की सच्ची अवस्था है। यह अवस्था ही आत्मा को परम तत्वों से जोड़कर विश्व परिवर्तन का कारण बनती है।”

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